खामोश अलविदा

2020-05-02

दुखी हैं अपने घरों में बहुत दिनों से लोग, नया है वायरस, संग लाया है नया रोग सुना है कुछ लोगों को दर्द में रोते हुए, और कहीं देखा है अपनो को खोते हुए आज मेरा भी मन है दुखी और परेशान, माँ मेरी खो बैठी है, अपने दिल ोर जान अल्लाह या भगवान् को दोनों हुए प्यारे, हिन्द की माटी के थे, वे दो राज दुलारे बात कर रहा हूँ दो महान कलाकारों की, अपने काम से बनाई जिन्होंने पहचान अब तक समझ ही गए होंगे मेरा इशारा, एक बेटा था ऋषि और दूजा था इरफ़ान दर्द तो सबको था, कल मैं भी थोड़ा रोया, क़र्ज़, रोग के गाने सुन, देर रात न सोया हिन्दू गया या मुसलमान, कोई फर्क नहीं, माँ ने तो आज अपने बेटों को है खोया ज़िंदादिल थे दोनों ही,कुछ समय से थे बीमार , कोरोना से सम्बन्ध नहीं, कैंसर के हुए शिकार पर कैसी है यह मजबूरी, अंत कोई ना पास, चले गए ख़ामोशी से, अब विदा हुआ हर श्वास ईश्वर ने है मर्ज़ी से दोनों को साथ बुलाया, सब ही तो हैं उस रब के, ना कोई कहीं पराया बस कर्म करो तुम सच्चा, ऊँचा हो सबका नाम, स्मरण करेंगे लोग सदा, हो नाम कपूर या खान - आशीष कपूर | ०२.०५.२०२० ऋषि कपूर और इरफ़ान खान को विनम्र श्रधांजलि